इससे
पहले आप यह सोचें की आप क्या पढ़ रहे है मैं आपको बता दूँ की यह गाना फिल्म पान सिंह तोमर का है और इसके बोल जावेद अख्तर ने लिखें है. और मुझे लगता है की इस गणतंत्र
दिवस पर यह गाना भारत के मन को सही रूप से कैद करता है. इसलिए मैं यह गाना आप सब के
साथ बांटना चाहता था. सुने और आनंद लें
देखो
हवा ज़ोर से
भड़की
तन
में नसें ज़ोर
से तड़की
अब
तो रंग जाएगी
धरती लाल लाल
देखो
हवा ज़ोर से
भड़की
तन
में नसें ज़ोर
से तड़की
अब
तो रंग जाएगी
धरती लाल लाल
पर
ये अपने मन की ना
ऐ
का
करेगा कोई उपाय
अब
तो करनी पड़ेगी
धाएं
धाएं
पर
ये अपने मन की
ना ऐ
का
करेगा कोई उपाय
अब
तो करनी पड़ेगी
धाएं
धाएं
तकिया है
बन्दुक हमारी
पत्थर
हमको लगे बिछोना
एक
दूजे का साथ
हमारा
बीहड़
में वनवास हमारा
आंधी
जैसा चलना सायें
सायें
पर
ये अपने मन की
ना ऐ
का
करेगा कोई उपाय
अब
तो करनी पड़ेगी
धाएं
धाएं
उखड
जायेगें वा के पांव
जो
हमसे घेरेगा दांव
दुश्मन
ते हम मज़ा चखा दे
लाशन
के अम्बार लगा दे
चील
कौआ करें काएँ काएँ
पर
ये अपने मन की ना
ऐ
का
करेगा कोई उपाय
अब
तो करनी पड़ेगी
धाएं
धाएं
पर
ये अपने मन की
ना ऐ
का
करेगा कोई उपाय
अब
तो करनी पड़ेगी
धाएं
धाएं
https://www.youtube.com/watch?v=quNX18O5T0o
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